जनता ने भाजपा को दिया जनादेश, 5 साल बाद फिर बनेगी बीजेपी की परिषद
उद्योग नगरी में खिला कमल का फूल 26 में से 19 वार्ड भाजपा के, कांग्रेस के 14 से घटकर 7 हुए
जनता ने भाजपा को दिया जनादेश, 5 साल बाद फिर बनेगी बीजेपी की परिषद
मंडीदीप। नगर पालिका चुनाव के लिए बीती 13 जुलाई को हुए चुनाव की बुधवार को ईवीएम से मतगणना कराई गई। जिसमें भाजपा ने उद्योग नगरी मंडीदीप में 26 वार्डों में से 19 में जीत दर्ज करके परिषद में दो तिहाई से अधिक बहुमत हासिल कर लिया है, जबकि कांग्रेस को 7 पर ही संतोष करना पड़ा है। महत्वपूर्ण बात यह है कि दोनों ही दलों से बागी होकर चुनाव लड़ने वाले 6-6 में से एक भी बागी चुनाव जीतने में सफल नहीं हो सका। वहीं कुछ इसी तरह की स्थिति 27 निर्दलीय उम्मीदवारों की भी रही। वार्ड 24 से रणजीत सिंह मीणा जीतते-जीतते चौथे राउंड में हार गए। जिससे इस बार नपा चुनाव में निर्दलीयों का खाता भी नहीं खुल पाया। 2016 में हुए चुनाव में भाजपा को 26 में से 12 और कांग्रेस को 13 सीटें मिली थीं। जबकि एक सीट वार्ड 22 से निर्दलीय के खाते में गई थी। हालांकि बाद में यह निर्दलीय पार्षद रेखा मीणा कांग्रेस के पाले में चली गई थी, इससे कांग्रेस पार्षदों की संख्या 14 हो गई थी। परिषद में इस एकतरफा जीत की बड़ी वजह भाजपा के इलेक्शन मैनेजमेंट के साथ उदयपुर के घटनाक्रम को भी माना जा रहा है। पिछली परिषद में सत्तारूढ़ रही कॉन्ग्रेस ने इस बार टिकट वितरण में एंटी इनकंबेंसी को ध्यान में रखते हुए पिछली बार चुनाव लड़े ज्यादातर नेताओं को टिकट नहीं दिया। 14 में से सिर्फ वार्ड 1 से पुराने चेहरे पिंकी पाल को रिपीट किया गया था। लेकिन वह भी चुनाव हार गई। वहीं भाजपा में भी टिकट वितरण को लेकर असंतोष के बड़े स्वर उठे थे और इसी के चलते छह बागी नेता चुनाव मैदान में उतर गए थे। लेकिन उनमें से एक भी चुनाव नहीं जीत सका।
दिग्गजों को देखना पड़ा हार का मुंह:
इस बार चुनाव में जनता ने कई चौंकाने वाले परिणाम दिए हैं जिसने दिग्गजों को धराशाई कर दिया है। इनमें मुख्य रूप से वार्ड 1 यहां 10 साल से कांग्रेस के पाल परिवार का कब्जा था, इस बार वार्ड की जनता ने बदलाव करते हुए भाजपा की पुष्पा साहू को चुना है। वही वार्ड 2 में 15 सालों से कॉन्ग्रेस का कब्जा था, तोमर परिवार तीन बार से चुनाव जीत रहा था चौथी बार के लिए भी ज्ञान सिंह तोमर मैदान में थे लेकिन मतदाताओं ने बीजेपी के रमेश तोमर को मौका दिया। सबसे अधिक चौंकाने वाला परिणाम वार्ड 5 से आया है इस पर पूरे नगर की निगाहें टिकी हुई थी। यहां से कांग्रेस के अख्तर अली तीन बार से चुनाव जीतते आ रहे हैं चौथी बार के लिए पार्टी ने अख्तर की पत्नी असीना को टिकट दिया था जिसे भाजपा के पूर्व जिला अध्यक्ष राजेंद्र अग्रवाल की पत्नी प्रियंका अग्रवाल ने पराजित करते हुए यह वार्ड पार्टी की झोली में डाल दिया। वार्ड 14 से भाजपा के ग्रामीण मंडल अध्यक्ष और पूर्व नेता प्रतिपक्ष सुशील शर्मा की पत्नी अर्चना शर्मा को हार का मुंह देखना पड़ा उन्हें पार्टी के बागी और कांग्रेस प्रत्याशी शेर सिंह चौहान की पत्नी रीना चौहान ने शिकस्त दे दी। इसी तरह हुजूर विधायक रामेश्वर शर्मा वार्ड 3 से संतोषी पाल और भाजपा से निष्कासित शिव सिंह चौहान अपनी बेटी व वार्ड एक से कांग्रेस प्रत्याशी पिंकी पाल एवं कांग्रेस के वरिष्ठ नेता नरेंद्र चौकसे वार्ड 4 से अपने भतीजे हेमंत चौकसे को जिताने में असफल रहे।वार्ड 21 से भाजपा जिला उपाध्यक्ष अरविंद जैन की पत्नी नीतू को कांग्रेस की रेनू से मात्र 7 वोटों से हार का सामना करना पड़ा। हालांकि इस पर आपत्ति जताते हुए उन्होंने रिटर्निंग ऑफिसर से रिटोटलिंग की मांग की है खबर लिखे जाने तक रिटोटलिंग शुरू नहीं हुई थी।
ये साख बचाने में सफल रहे:
इस चुनाव में विधायक सुरेंद्र पटवा से लेकर सीएम शिवराज सिंह चौहान तक की साख दांव पर लगी हुई थी इनके अलावा स्थानीय स्तर पर बात करें तो भाजपा से पूर्व नपा अध्यक्ष विपिन भार्गव,पूर्व जिला अध्यक्ष राजेंद्र अग्रवाल एवं जिला मंत्री प्रेम शंकर साहू के साथ कांग्रेस नेता दीपेश मीणा, पूर्व नपा अध्यक्ष बद्री सिंह चौहान तथा पूर्व जनपद अध्यक्ष अशोक पटेल की प्रतिष्ठा दांव पर लगी थी।ये 6 नेता ना केवल अपनी प्रतिष्ठा बचाने में सफल रहे बल्कि अपनी पत्नियों को भी जिताने में कामयाब हो गए।



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